Sunday, March 25, 2007

कुछ कमी

बस कुछ कमी सी रहती है,
जब इन बाहों में कोइ बाहें ना हों
बस कुछ कमी सी रहती है,
जब इन आँखों में कोइ आँखें ना हों
बस कुछ कमी सी रहती है,
जब इन होठों पे कोइ होठ ना हों
बस कुछ कमी सी रहती है,
जब इन हाथों में कोइ हाथ ना हों
बस कुछ कमी सी रहती है,
जब दिल किसी के लिये बेकरार ना हो
बस कुछ कमी सी रहती है,
जब किसी से प्यार ना हो

- प्रेम

2 comments:

Ajay Balachandran said...

Mast likte ho...lekin ye prem kaun hai?

Kisi me tera nam hai...kisi me kisi aur ka

!Teq-uila Del Zapata said...

shringaar ras... not much like it. but good try anyway