Thursday, January 18, 2007

मत रो , तू मुस्कुरा

मत रो , तू मुस्कुरा
यह जिन्दगी ले रही है तेरा इम्तिहान

दिन वह भी आऎगा,
तू जीत का परचम लहराऎगा,
राहें मुश्किल जरूर है,
पर मत बन तू अधीरा ,

मत रो , तू मुस्कुरा..........

विश्वास रख स्वयं पर,
मत मन की उड़ानों के पर कतर,
तेरे माथे का तिलक भी,
बनेगा कभी तो यह अबीरा,

मत रो , तू मुस्कुरा..........

रात अंधियाली काली आज है,
पर कल पर चला किसका राज है,
कर्म कर, मत सोच क्या मिला,
कल कदमों तले होगी तेरे यह धरा,

मत रो , तू मुस्कुरा..........

-देवेश कुमार सिंह

1 comment:

!Teq-uila Del Zapata said...

nice one once again. maintained the flow.
introduction is little cliched. loved these lines kal par chala kiska raaj hai.