Saturday, April 05, 2008

जीवन ये बितायें भी तो किस तरह?
हर साँस में बसी याद तुम्हारी,
दर्द ही दर्द है हर अहसास में,
आँख में है हर वक्त नमीं हमारी,

वादे जो तुमने कभी किए ही नहीं,
ना जाने क्यों, निभाने उन्हें हम चल दिये,
जो राह तुमने कभी दिखाई ही नहीं,
ना जाने क्यों, नग्न पग हम उस ओर बढ़ दिये,

तन्हा भी तन्हाई यूँ तो कट जाती,
जो सामने तुम न आते इस तरह,
वक्त-बेक्त होता है दीदार तुम्हारा,
तुमको भुलाऐँ भी तो किस तरह,

जीवन ये बितायें भी तो किस तरह?

--- देवेश कुमार सिंह(dated : 5/4/2k8 , 5:52 pm)
यदा कदा ही लिखता हूँ मैं,
जाने किसकी राह तकता हूँ मैं,
ये काया, मन की छाया,
सर्मपित करने को चहकता हूँ मैं,

आद्र नयन कहते हैं कुछ,
इन्हें समझाता हूँ मैं,
तेल था वो जल गाया,
अब खाक बाती जलाता हूँ मैं,

--- देवेश कुमार सिंह
(dated : 6/3/2k8 , 9:20 pm)