जीवन ये बितायें भी तो किस तरह?
हर साँस में बसी याद तुम्हारी,
दर्द ही दर्द है हर अहसास में,
आँख में है हर वक्त नमीं हमारी,
वादे जो तुमने कभी किए ही नहीं,
ना जाने क्यों, निभाने उन्हें हम चल दिये,
जो राह तुमने कभी दिखाई ही नहीं,
ना जाने क्यों, नग्न पग हम उस ओर बढ़ दिये,
तन्हा भी तन्हाई यूँ तो कट जाती,
जो सामने तुम न आते इस तरह,
वक्त-बेक्त होता है दीदार तुम्हारा,
तुमको भुलाऐँ भी तो किस तरह,
जीवन ये बितायें भी तो किस तरह?
--- देवेश कुमार सिंह(dated : 5/4/2k8 , 5:52 pm)
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